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Hymn No. 1880 | Date: 20-Jul-2000
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हें ऐं। जानम होगे दाग ढेर सारे दामन पे हमारे।
हें ऐं। जानम होगे दाग ढेर सारे दामन पे हमारे।
पर मेरा प्यार सच्चा है प्रियतम् के वास्ते।
कबूल है हमको लगाये जो भी इ इलजाम तू हमपे।
सनम कसम से प्यार मेरा सच्चा है तेरे वास्ते।
खराब हूँ मैं बहुत ही छोड़ता नहीं अपनी कमजोरियों को।
फिर भी करुँगा सीनाजोरी तुझसे प्यार करने के वास्ते।
कई बार ज्ञटका राह से अपने कामनाओं के चलतें।
पर तेरा दामन ना छोडूंगा, कुछ भी हो जाये साथ मेरे।
मंजूर है हर वो आरोप, जो लेके कहे गये है तूझे।
निर्लज्जता की पराकाष्ठा पे बैठा हूँ तेरे मामले में।


- डॉ.संतोष सिंह