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Hymn No. 1879 | Date: 20-Jul-2000
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मत कर इतना शोर मेरे खराब होने का।
मत कर इतना शोर मेरे खराब होने का।
मेरे खराब होने के पीछे है हाथ तेरा।
माना हमने की है कई भूल, एक बार नहीं कई बार।
तब तो थे अबोध, बोध हो गया पास आके तेरे।
जैंसे – जैसे बड़ी नजदीकियाँ तेरे – मेरे बीच में।
जो आया था होश में, वो भी जाता रहा।
साकी पीने की जरूरत ना पड़ती है हमको।
मदहोशी के वास्ते तेरी इक् नजर है कॉफी।
होगा दस्तूर जमाने में, हम तो मजबूर हैं तेरे प्यार में।
अब बंद हो या नाय, हमकों न देना इलजाम।


- डॉ.संतोष सिंह