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Hymn No. 518 | Date: 22-Dec-1998
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कीतनी कसर बाकी है पूरी होनें में खास हमारीं ।
कीतनी कसर बाकी है पूरी होनें में खास हमारीं ।

बेखौफ हूँ मौत से मैं, तैयार बैठा हूँ तुझसे मिलनें के लिये।

ना ही देरी चवाहता हूँ, ना ही जल्दी, हम हर पल तूझे है चाहते ।

कमीं जो भी है हमनें पूरी करनीं होगी तूझे मधुर मिलन के वास्ते।

सबनें सहेंजा है कूछ ना कूछ तूझे देने के वास्ते।

मेरे पास कूछ ना है, सिर्फ रूंधे गले की आवाज ।

एक से बडके एक है तेरे यार, जो करते है प्रिय तुझसे बहुत प्यार ।

नाचीज की कोई हैसियत ना है फिर भी अर्पण करता है चरणों में तेरे दिल को।

सहेंजना अब कूछ नहीं चाहता, प्यार में तेरे बिखर जाना है चाहता।


- डॉ.संतोष सिंह