VIEW HYMN

Hymn No. 1883 | Date: 22-Jul-2000
Text Size
दिल की बात तुझसे ना कहूँ तो किससे कहूँ।
दिल की बात तुझसे ना कहूँ तो किससे कहूँ।
जलता हूँ रात – दिन होता है शांत मिलने पे तुझसे।
बेकार की बात लगती होगी तुझे मेरी सारी की सारी।
तेरे प्यार को शब्द देने की करता हूँ नाकाम कोशिश।
अजिज आ चुका हूँ अपने काज से, बनना चाहूँ रसिक तेरा।
वश में ना हूँ अपने आपके, खिंचा चला जाऊँ तेरे पीछे।
जो भी आरोप लगा दें कबूल है हमको तेरे वास्ते।
सौदागर है तू अगर प्यार का, तो बिक् जाऊँ तेरे हाथों।
बदनाम होके जीना मंजूर है, पर ना मंजूर कुछ तेरे बिना।
लाख करता हूं शरारत तुझसे, पर न तोड़ा तेरा दिल कभी।


- डॉ.संतोष सिंह