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Hymn No. 1873 | Date: 17-Jul-2000
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हमको कहना न आया अब तक तुझसे।
हमको कहना न आया अब तक तुझसे।
कभी सोचो आँखों में आँखे डालके कह दू सब कुछ।
रब हो जाते है तब और मुश्किल, गुम हो जाते है शब्द।
मुस्कान तेरी कर जाती है घायल, हो जाता है दौर शुरू मस्ती का।
हर भार सम्भाले हुये जाता हूँ पास तेरे।
फिर होता है ज्यों का त्यों हाल, गलती नहीं मेरी राल।
बेचैन हो जाता है मन, तेरी हर अदा के पीछे।
फिदा तो पहले से था, दिल को रास न आयी तेरी जुदाई।
कैसे भी करके रख ले हमको तू बनाके दास पास अपने।
धीरे – धीरे हो जायेगा वास तेरा, तन – मन के हर कोने में।


- डॉ.संतोष सिंह