प्रभु हम है तेरे दासों के दास, कर ले तू हमारे दिल में वास ।
Bhajan No.1198 | Date: 04-Jul-1999
प्रभु हम है तेरे दासों के दास, कर ले तू हमारे दिल में वास ।
आया हूँ तेरे दर पर याचक बनकर, याचना करुँगा नित्य कई बार ।
ऐ गुणो के सागर स्वीकार कर ले, इस अवगुण की खान को ।
मंगल गान गाऊँगा बैठ चरणों में तेरे, तेरा मन बहलाऊँगा ।
एक भी विधा नही ऐसी, जो रीझा सकूँ मैं तुझे ।
अल्प बुद्धिवाला, कुमति का साथ सदा, संगत पाया उच्च आदर्शों का ।
सच कहूँ तेरी कृपा है, नहीं तो कोई पास फटकने नहीं देता मुझे ।
दे-दे ताकत इतनी, अपनी खाल उधेड़कर बनाऊं जूती उसकी ।
धारण तू करे और तेरे बंदे, कृत-कृत हो जाएगा ये अभागा ।
सदभाग्य बनना नहीं चाहता, बस तेरी बंदगी करना हूँ चाहता ।
- डॉ.संतोष सिंह